कुंडली देखने का तरीका
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कुंडली देखने का तरीका

कुंडली देखने का तरीका

नमस्ते दोस्तों, आज हम आपको कुंडली देखने का तरीका बताने वाले हैं | हम देखते हैं कि बहुत सारे लोगों को कुंडली देखते नहीं आती है, अगर आपको कुंडली देखने के महत्वपूर्ण सूत्र पता नहीं है तो सबसे पहले आपने कुंडली कैसे देखते हैं यह जान लेना चाहिए \ क्योंकि जन्मपत्रिका देखना कोई मामूली बात नहीं होती है, बड़े-बड़े ज्योतिष जन्म पत्रिका को देखते ही मनुष्य का भविष्य बता देते हैं | कई बार जिन लोगों की कुंडली में कोई ना कोई गलती होती है उन लोगों की कुंडली पढ़ते समय ज्योतिष को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है | इसलिए कुंडली पूरी तरह से परफेक्ट होना जरूरी है |

कुंडली देखने का तरीका
कुंडली देखने का तरीका

कुंडली देखते समय कुंडली का और आपके जन्म तारीख में तालमेल होना जरूरी होता है | अगर आपकी कुंडली पूरी तरह से सही है तो आसानी से आपका भविष्य आप जान सकते हो | आज हम देखेंगे कुंडली देखने के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र |

कुंडली देखने का तरीका -:

  • आमतौर पर देखा जाए तो जन्मपत्रिका में १२ हिस्से होते हैं | कुंडली में जन्म का समय और जन्म के दिन के बारे में पूरी जानकारी होती है | अगर आपको विवाह निश्चित करना है तो आपके कुंडली में कौन से कौन से ग्रह बैठे हुए हैं यह जानना चाहिए | कुंडली होने के कारण आपको आसानी से पता चल जाएगा कि आपकी कुंडली में कौन से ग्रह का प्रभाव सकारात्मक है और कौन से ग्रह का प्रभाव नकारात्मक है |
  • विवाह निश्चित करने से पहले शरीर, व्यक्तिमहत्व, चंचलता, पारिवारिक स्थिति, राजदंड मार्ग, इन चीजों का अभ्यास होना जरूरी होता है | यह सारी चीजें कुंडली देखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, कई बार कनिष्ठ और वरिष्ठ भाव से कुंडली का गठन किया जाता है | हर साल में ऐसे कुछ दिन होते हैं जिन दिनों में हम वरिष्ठ पुत्र की या वरिष्ठ पुत्री की शादी नहीं कर पाते हैं |
  • कुंडली का पठन करते समय पंचम भाव का अभ्यास ज्योतिषों को करने के लिए कहना चाहिए | पंचम भाव में मधुबन मनोरंजन, प्रेम षष्ट भाव से श्रम पुत्र धन प्रवास, अचल संपत्ति, सप्तम भाव, संपत्ति दांपत्य, जीवन विवेचना, सन्यास,प्रशासनिक सेवा, अभीष्ट प्राप्ति,इन चीजों का पठन करना चाहिए, जिससे आपको पूरी तरह से समझ जाएगा कि आपका ब्याह कब होने वाला है |
  • स्त्री की कुंडली देखते समय कुंडली में स्वामी और ग्रह किस भाव में है और किस स्थिति में है यह देखना बहुत ही जरूरी होता है | वर्तमान ग्रहों का प्रभाव कितना सकारात्मक है और कितना नकारात्मक है यह भी देखें जिससे आपका जीवनमान किस तरह का होगा यह हम आसानी से जान सकते हैं | स्त्री के कुंडली में मारक स्थान और मार्गदर्शन आवश्यक होती है जिसके कारण अंतर्दशा का भी अभ्यास करें |
  • जन्मपत्रिका देखते समय सप्तमेश में शनि मंगल और बुद्ध सकारात्मक है या नहीं यह देखना चाहिए | क्योंकि जन्म पत्रिका देखते समय इन तीनों ग्रहों का प्रभाव सौम्य होना चाहिए | जन्मपत्रिका ठीक ढंग से मिलाने के लिए ऊपर दिए गए सारे चीजों का इस्तेमाल करें | यह थे कुंडली देखने के महत्वपूर्ण सूत्र, कुंडली कैसे देखते हैं, कुंडली निकालने के तरीके, के बारे में जानकारी |

यह था कुंडली देखने का तरीका क्या है के बारे में जानकारी |

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